Ashok Stambh Facts 2021 (अशोक स्तंभ )


Ashok Stambh Facts 2021 (अशोक स्तंभ )
आज हम अशोक स्तंभ के बारे मे जानेंगे। देश के एक नागरिक होने के नाते आपको इसके मे पता होना बहोत जरुरी है। 

स्तंभ का निर्माण सन २५० bc सम्राट अशोक द्वारा कराया गया था। क्योकि कलिंग युद्धा के भयानक परिणाम को देखकर सम्राट अशोक का दिल एकदम पीघल गया था। और उसके बाद उन्होने बुद्ध धर्म को अपना लिया। फिर उन्होने सारनाथ मे अपना पहला ज्ञान का उल्लेख किया था। वहा उन्होने इस स्तम्भ  निर्माण कराया। 

हाथी पूर्व दिशा में है। 

तो दौड़ता घोडा पश्चिम मे। 

शेर उत्तर दिशा में है। 

तो बैल दक्षिण में है। 

जगभर 

और घोड़ा जो है आत्मज्ञान की प्राप्ति को दर्शाता है। बीच में आपको चक्र दिखता है यह धर्म चक्र कहलाता है यह धर्म चक्र को दर्शाता है ऊपर इसके ऊपर जो चारों शेर है चारों दिशाओं में जो शेर हैं जिन्हें एशियाटिक लायन भी कहते हैं वह चारों दिशाओं में महात्मा बुध के धन के विस्तार को दर्शाते हैं।

बाद में सन 1947 में इस स्तंभ को एक चीन को डोमिनियन ऑफ इंडिया के रूप में अपनाया गया और बाद में जब भारतीय संविधान के ओरिजिनल कॉपी को सजाने की बात आई तो कांग्रेस ने इस काम के लिए नंदलाल बोस जी को चुना जो कि उस वक्त कला भवन सांतिनिकेतन के प्रिंसिपल चाहते थे।

कि लायन कैपिटल आफ अशोका को संविधान के पन्नों में दर्शाया जाए जिसके लिए उन्होंने अपने एक छात्र दीनानाथ भार्गव की सहायता ली जो कि 21 वर्ष का था। वह रोज पूछी से कहता था कि वह शांतिनिकेतन से कोलकाता चिड़िया घर जाना चाहता है ताकि वह शेरों की और उनके तौर-तरीकों को देख सके उनको महसूस कर सके इसी रुचि को देखते हुए।

उसे लाइन कैपिटल ऑफ अशोका का स्केच बनाने को कहा जो एकदम असली शेरों की तरह दिखे और उन्होंने कर लिया कि इसे भारतीय संविधान में अंकित करेंगे और 26 जनवरी 1950 को लायन कैपिटल आफ अशोका को राष्ट्रपति के रूप में अपनाया गया है सत्यमेव जयते आ गया है। सारनाथ में सम्राट अशोक द्वारा बनवाया गया था लाल बलुआ पत्थर से बने इस स्तंभ में 350000 लोगों का योगदान रहा है।

इस स्तंभ का ऊपरी हिस्सा जिसे लायन कैपिटल ऑफ अशोक कहते हैंइस समय सारनाथ म्यूजियम में स्थित है। जो कि वाराणसी के पास है या हिस्सा पहले से अलग करके सुरक्षा की दृष्टि से म्यूजियम में रखा गया है या 2.15 मीटर अर्थात 7 फिट लंबा है पर तिलक अपने वास्तविक स्थान पर ही स्थित है स्तंभ के शीर्ष भाग में 4 से चार दिशा में बने हुए हैं।

जिन्हें एशियाटिक लायंस भी कहा जाता है इस लाइन होते हैं जिनके चेहरे के चारों तरफ लंबे घने बाल होते हैं। मित्रों 1950 से पहले ही दिसंबर 1947 में राष्ट्रीय मान लिया गया था जब भारत गणराज्य नहीं हुआ था लेकिन आधिकारिक तौर पर 26 जनवरी 1950 को राष्ट्रीय चिन्ह घोषित किया गया उद्देश्य है सत्यमेव जयते अर्थात सत्य की विजय हो जो कि हिंदू वेद के एक भाग में से लिया गया है।

मित्रों आपने देखा होगा कहीं कि संविधान के पहले पन्ने पर हमारे राष्ट्रीय चिन्ह अंकित है। आपको मालूम है यह किसने बनाया था यह हाथ से बनाया गया है और इसे बनाया था दीनानाथ भार्गव ने संविधान ही हाथ से लिखा गया है और किस तरह से बनाया गया चित्र कुछ खास है क्योंकि यह हमारा राष्ट्रीय चिन्ह है और सिद्धिनाथ भार्गव ने बनाया था उन्हें इसलिए चुना गया था इसे बनाने के लिए क्योंकि वह कोलकाता में शेरों के व्यवहार पर अध्ययन कर रहे थे।

इसीलिए उनका चुनाव हुआ था ताकि इस चित्र में वह वास्तविकता को ला सकें राष्ट्रीय चिन्ह का उपयोग भारत सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से सजाया जाता है और यह भारतीय मुद्रा पर भी अंकित रहता है। भारतीय पासपोर्ट पर रहता है लेकिन इसका उपयोग प्राइवेट ऑर्गनाइजेशन के लिए कोई व्यक्ति समुदाय वगैरह आधिकारिक तौर पर नहीं कर सकते हैं।

अशोक स्तंभ में से एक के पीछे एक स्थित है यह शक्ति का आत्मविश्वास और गर्व का प्रतीक है शास्त्रों के आधार में आपने देखा होगा कि एक घोड़ा बैल एक शेर और एक हाथी है जिनके प्रत्येक के बीच में धर्म चक्र बना हुआ है। जिसे भारत में अशोक चक्र भी कहा जाता है जो कि प्रगति का प्रतीक है घोड़ा भारत के पश्चिम में प्रसिद्ध है हाथी पूर्व में तेज उत्तर में और बेल्ट है और यह एक कमल पर स्थित है जिनकी पंखुड़ियां बाहर की तरफ नीचे की तरफ झुकी हुई है जो जीवन में विनम्रता और रचनात्मकता को प्रेरणा देती हैं और आपको मालूम है।

यह सब एक पत्थर के टुकड़े से बनाया गया है और कहते हैं कि पॉलिश किए गए इस स्तंभ के दम शीर्ष पर धर्म चक्र सविता परंतु वास्तविक जो आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय माना गया है उसमें तीन से ही दिखते हैं एक पीछे वाला से नहीं दिखाई पड़ता है एक चक्र बीच में दिखता है जिसके बाद भरता हुआ घोड़ा और दाएं और बैल दिखाई पड़ता है इसके पीछे के हाथी नहीं दिखाई पड़ते हैं अंतिम रूप से स्वीकार किया गया है।

इसमें एक और चीज जोड़ी गई है जो कि नीचे सत्यमेव जयते लिखा हुआ आपको देखता होगा आपने बहुत जगह देखा होगा भारतीय राष्ट्रीय चिन्ह के रूप में जहां पर यह चमार होता है हर जगह अब तक दिखाई देता है उसमें तीन ही शेर दिखाई देते हैं पीछे वाला नहीं दिखता है और जैसे कि मैंने पहले बता दिया है और इसमें सत्यमेव जयते एक अंत में बाद में जोड़ा गया था।

जो कि अशोक स्तंभ से संबंधित नहीं था और दोनों एकदम तुम दोनों किनारों पर धर्म चक्र के बाहर ही रेखा उभरे हुए दिखाई देती है मित्र हमारे राष्ट्रीय चिन्ह में जो बैल दिखाई देता है वह कठिन परिश्रम और निरंतरता का प्रतीक है और जो घोड़ा दिखाई देता है वह वफादारी ऊर्जा और वह का प्रतीक है अर्जुन नीचे के कमल का आधार था।

वह छोड़ दिया गया है उसे राष्ट्रीय चिन्ह में नहीं लिया गया है और कहा जाता है कि अशोक स्तंभ का यह सिर्फ भाग्यनाथ म्यूजियम में रखा गया है यह टोटल 50 का है मित्र हमारे देश का राष्ट्रीय चिन्ह दुनिया में सबसे अलग है। या हमारे देश की ऐतिहासिक कलाकृति का अद्भुत और बेजोड़ नमूना है।