सम्राट अशोक का महान इतिहास

सम्राट अशोक का इतिहास Samrat Ashok Story 2021


सम्राट अशोक भारतीय इतिहास का एक ऐसा राज्य के शासक थे जिन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप पर शासन किया था इनका पूरा नाम अशोक बिंदुसार मौर्य है और उनका जन्म स्थान पाटलिपुत्र में है.

इनके पिता का नाम था राजा बिंदुसार अशोक मौर्य शासक बिंदुसार और माता सुभद्रा की के बेटे के रूप में और मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य के पोते के रूप में जन्म लिया इनका पूरा नाम देवा नाम प्रिय अशोक मौर्य जो कि राजा प्रियदर्शी देवताओं के प्रति उन्हें मौर्य साम्राज्य का तीसरा शासक माना जाता है.

ऐसा कहा जाता है कि सम्राट अशोक को कुशल सम्राट बनाने में आचार्य चाणक्य का बहुत बड़ा योगदान रहा स्वागत है लड़ने के गुण दिखाई देने लगे थे इसीलिए उन्हें शाही प्रशिक्षण दिया गया एक उच्च श्रेणी के शिकारी भी कहलाते हैं उन्होंने केवल लकड़ी की घड़ी से शेर का शिकार किया था.

जिंदादिल शिकारी और साहसी जोधा उनके इसी गुणों के कारण उन्हें उस समय मौर्य साम्राज्य के अवंती में हो रहे दंगों को रोकने के लिए भेजा गया 200 मौर्य साम्राज्य सम्राट अशोक ने अफगानिस्तान के हिंदुकुश में अपने साम्राज्य का विस्तार किया था उनके साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र जोकि मगर आज का बिहार है और साथ ही उपराजधानी तक्षशिला और उज्जैन भी थी।

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अशोक ने अपने आप को कुशल प्रशासक करते हुए 3 साल के अंदर ही राज्य में शांति स्थापित उनके शासनकाल में देश ने ज्ञान और तकनीक के साथ-साथ चिकित्सा में काफी तरक्की की उन्होंने धर्म पर दिया कि ईमानदारी और सच्चाई के रास्ते पर चलने लगी और लूटपाट की घटनाएं बिल्कुल बंद हो गई और मानवतावादी जनता की भलाई के काम किया करते थे उन्हें विशाल साम्राज्य के किसी भी हिस्से में होने वाली घटना की जानकारी रहती थी.

धर्म के प्रति आस्था की अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह बिना 1000 ब्राह्मणों को भोजन कराएं स्वयं कुछ नहीं खाते थे।

कलिंग युद्ध अशोक के जीवन का आखिरी युद्ध था जिससे उनका जीवन ही बदल के खिलाफ़ युद्ध की घोषणा की थी उन्होंने जीत हासिल की इससे पहले उनकी ऐसा नहीं किया था कल के युद्ध में कई लोगों की मृत्यु होने के बाद अशोक ने बुद्ध धर्म को अपना लिया था कहा जाता है।

कि अशोक के कलिंग युद्ध में तकरीबन 100000 लोगों की मौत हुई थी और डेढ़ लाख लोग घायल हुए थे इस युद्ध में हुए भारत-पाक ने उन्हें हिला कर रख दिया है और जीवन में फिर कभी युद्ध करने का प्रण लिया इसके बाद अशोक ने धर्म परिवर्तन का मन बना लिया उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया और अहिंसा के पुजारी हो गए धर्म के प्रचार के लिए तंबौर का निर्माण करवाया।

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अशोक के अनुसार बुद्ध धर्म सामाजिक और राजनीतिक एकता वाला धर्म था बुध का प्रचार करने के लिए उन्होंने राज्य में जगह-जगह पर भगवान बुद्ध की प्रतिमाएं स्थापित और बुद्ध धर्म का विकास करते चले गए।

बौद्ध धर्म को अशोक नहीं विश्व धर्म के रूप में मान्यता दिलाई देशों में बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए अशोक ने अपने पुत्र और पुत्री को भिक्षु भिक्षु के रूप में भारत से बाहर भेजा सार्वजनिक कल्याण के लिए उन्होंने जो कार्य किए वह इतिहास में अमर हो गए नैतिकता उदारता भाईचारे का संदेश देने वाले अशोक ने कई अनुभवों और देश के कोने कोने में संभव और शिलालेखों का निर्माण भी कराया।

धर्म के संदेश अंकित भारत का राष्ट्रीय चिन्ह अशोक चक्र और शेर की भी अशोक महान की देन है यह कृतियां अशोक निर्मित और अंकित है सम्राट अशोक का अशोक चक्र चक्र भी कहा जाता है आज वह में भारतीय गणराज्य के तिरंगे के बीच में दिखाई देता है जो कि वाराणसी में बौद्ध स्तूप मूर्तियों की प्रतिकृति है।

अशोक का अर्थ दर्द रहित या फिर चिंता मुक्त होता है अपने आदेश पत्र में उन्हें देवनाम्प्रिया और कहा जाता है कहा जाता है कि सम्राट अशोक का नाम अशोक के पेड़ से ही लिया गया था।

किताब है जिसका नाम है इतिहास में हजारों नाम से जानते हैं जहां जहां उनकी वीरता के किस्से हैं उनकी दयालु और शक्तिशाली सम्राट के नजरिए से अगर देखा जाए तो सम्राट अशोक ने अपने समय में ना केवल मानवों की चिंता की बल्कि उन्होंने जीव मात्र के लिए कई सराहनीय काम भी किए हैं।

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सम्राट अशोक को एक निडर साहसी राजा और युद्ध माना जाता है अपने शासनकाल के समय में सम्राट अशोक अपने साम्राज्य को भारत के सभी उपमहाद्वीप तक पहुंचाने के लिए लगातार 8 सालों तक युद्ध लड़ते रहे जिसके चलते।

सम्राट अशोक ने कृष्ण गोदावरी की घाटी दक्षिण में मैसूर में भी अपना कब्जा कर लिया लेकिन तमिलनाडु केरल और श्रीलंका नहीं कर पाए सम्राट अशोक महान शासक हमेशा इतिहास में कोई दूसरा दिखाई देगा कार में चमकने वाले तारे की तरह है जो हमेशा ही रहता है। भारतीय इतिहास का यही चमकता था सम्राट अशोक प्रजापत शासक के रूप में उनका नाम अमर रहेगा उन्होंने जो त्याग और कार्य किए वैसा अन्य कोई नहीं करता था सम्राट अशोक में लगभग 40 वर्षों तक शासन किया इसके आसपास उनकी मृत्यु हुई।